Saturday, 23 May 2020
Friday, 15 May 2020
Sunday, 10 May 2020
कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते खतरे
आज देश में कोरोना वायरस
महामारी के बढ़ते खतरे को देखते हुए, स्वामी आत्मानंद सेवा संस्थान ने भी लोगों से धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के
सेवन और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से परहेज करने की अपील की है।
धूम्रपान रहित तम्बाकू उत्पाद, पान मसाला और एस्कुट नट (सुपारी)
चबाने से लार का उत्पादन बढ़ता है, जिसके बाद थूकने की बहुत तीव्र
इच्छा होती है। सार्वजनिक स्थानों पर थूकना COVID-19
वायरस के प्रसार
को बढ़ा सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इसके विनिर्माण और
व्यापारों को शुरु करने की अनुमति प्रदान करने सम्बन्धी आदेश दिए जाने से उत्तर
प्रदेश में हमारी COVID-19 के खिलाफ लड़ाई को धक्का पंहुचा है।
हम सरकार से इस
आदेश को निरस्त करने तथा कोविद-19 से ही नहीं बल्कि हमारे समाज में व्याप्त इन्फ्लुंजा,
ओरल एवं मुंह के कैंसर एवं अन्य खतरनाक बीमारियों से लाख लोगो की जिंदगियो को बचने
का विनम्र अनुरोध करते है। जिससे लोगो को इन उत्पादों के इस्तेमाल की गलत लत न लगे
और वे स्वस्थ जिंदगी जी सके।
विमल कुमार
स्वामी आत्मानंद सेवा संस्थान, फतेहपुर
Friday, 24 April 2020
Setu Mera Bodyguard
आप लोगों से विनम्र अनुरोध है कि नीचे दिए गए लिंक आरोग्य सेतु एप को आप इंस्टॉल कर रजिस्टर करें और अपने आस पास कम से कम 200 लोगों तक यह एप पहुचाने में मदद करे और देश के साथ करोना कि इस लड़ाई में अपनी सहभागिता निभाएं और जागरूकता फैलाएं औरों को भी प्रेरित करें
https://play.google.com/store/apps/details?id=nic.goi.aarogyasetu
iOS : https://apps.apple.com/in/app/aarogyasetu/id1505825357
यह आपकी सहयोग और सहभागिता को दर्शाता है
धन्यवाद
जय हिन्द जय भारत
Wednesday, 22 April 2020
Covid 19
कोरोना एक प्राण घातक रोग है और इससे बचाव ही इसकी दवा है। यह रोग चीन के वुहान शहर से शुरू हो कर पूरे विश्व में फ़ैल गया और इतना विकराल हो गया की भारत जैसे देश को पूरी तरह बंद घोषित कर दिया गया। आईये इसे विस्तार में जानते हैं।
कोरोना एक वायरस जनित रोग है जिसने महामारी का रूप ले लिया है और समस्त संसार में तबाही मचा रहा है। इस रोग की शुरुआत जुकाम एवं खासी मात्र से होती है जो धीरे-धीरे आगे चल कर एक विकराल रूप ले लेती है और रोगी के स्वसन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करती है। इतनी बुरी तरह की कई बार रोगी की मृत्यु हो जाती है।
कोरोना उतपत्ति कहाँ से हुई?
कोरोना की उत्पत्ति सबसे पहले 1930 में एक मुर्गी में हुई थी और इसने मुर्गी के स्वसन प्रणाली को प्रभावित किया था और आगे चलकर 1940 में कई अन्य जानवरों में भी पाया गया। इसके बाद सन् 1960 में एक व्यक्ति में पाया गया जिसे सर्दी की शिकायत थी। इन सब के बाद वर्ष 2019 में इसे दुबारा इसका विकराल रूप चीन में देखा गया जो अब धीरे-धीरे पूरे विश्व में फैलता जा रहा है।
क्या है कोरोना के प्रमुख लक्षण
एक कोरोना प्रभावित व्यक्ति में तुरंत असर नहीं दिखता, उसमे इसके लक्षण दिखने में करीब 14 दिन भी लग जाते हैं। इस लिये यदि आप कही संक्रमित क्षेत्र से आये हों या आपको जरा भी संदेह हो तो खुद को सब से अलग कर लें और जब तक खून की जांच का रिपोर्ट नहीं आजाता खुद को सुरक्षित रखें। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:
- सुखी ख़ासी आना
- बुखार का रहना
- सर्दी होना
- शरीर में अकड़न और दर्द
- पूरा दिन थकान महसूस करना
- सांस लेने में तकलीफ।
- गले में खराश।
कैसे करें कोरोना से बचाव
कोरोना से बचाव करने में ही समझदारी है, क्यों की यह एक संक्रामक रोग है जो बहुत ही तेजी से एक दूसरे में फैलता है। डब्लू एच ओ ने कुछ सावधानियों की सूची निकाली है और यह भी बताया है की कोरोना से बचाव के ये मूल मंत्र हैं। आइये इन्हें विस्तार में जानते हैं।
- सदैव बहार से आने के बाद अपने हाथों को साबुन से करीब 20-30 सेकंड तक अवश्य धोएं।
- अपने हाथों को अपने मुख से दूर ही रखें, जिससे की संक्रमण होने पर भी आपके अंदर न जा पाए।
- लोगों से 5 से 6 फीट की दूरी सदैव बनाये रखें।
- जरूरी न हो तो बाहर न जाये।
- सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें।
- सदैव मास्क और ग्लव्स पहने।
- संक्रमण की स्थिति में खुद को दूसरों से अलग कर लें और नजदीकी अस्पताल में सूचित करें।
सतर्क रहें स्वास्थ्य रहें और कोरोना को दूर भगाएं। सरकार द्वारा उठाये गए क़दमों का पालन करें और उनके दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। आज तक कई महामारी आ चुके हैं और जब हम सबको हरा सकते हैं तो ये कौनसी बड़ी बिमारी है। दूसरों के चक्कर में पड़ने से अच्छा है अपनी रक्षा करें, यही काफी है।
Saturday, 14 December 2019
Motivational Story : जीत आपकी
Motivational Story : जीत आपकी
एक
समय की बात
है किसी गॉवो
, में एक गुफा
थी जिसे लोग
मौत गुफा के
नाम से जानते
थे | कोई भी उसके
आस पास भी
नहीं जाना चाहता
था | और ऐसा
इसलिए था क्यों
की उस गुफा
में आज तक
जो भी गया
था कभी वापस
लौट कर नहीं
आया | लोग उस
गुफा के बारे
में सोचकर डर
जाते |
अब
उस गुफा में
लगभग ३०० लोग जा
चुके थे और
कोई भी लौटकर
नहीं आया | उसी
गॉव में एक युवक
आया | और उसे
इन सब बातो
पर यकीन नहीं
हुआ की आज के
ज़माने में ऐसा
कही होता है
| उसने तय किया
वह उस गुफा
में जाएगा | पर
जैसे ही गॉव
के लोगो को
ये पता चला
की वह युवक
उस गुफा में
जा रहा है
| तो
सब उसके घर
के पास इक्कठे
हो गए और
उसे समझने लगे
की तुम आखिर
क्यों जाना चाहते
हो | अगर गए
भी तो लौट
कर वापस नहीं आ
पाओगे |
पर
उसने उन सब
लोगो की बात
नहीं सुनी और
अगले दिन सुवह
ही वह उस
गुफा की तरफ
गया | और गुफा
में अंदर जाते
ही कुछ आगे
जाने पर बहुत
अँधेरा था | धीरे
धीरे वह गुफा
में काफी अंदर आ
गया | तभी उसके
लगा कोई उसका
पीछा कर रहा
है और किसी
ने पीछे से
उसे धक्का दिया
| युवक ने
पीछे पलटकर देखा तो वहां
४ आदमी खड़े
थे | वो उसे
बंद कर एक
जगह ले गए
| उसने देखा वो
जगह बहुत ही
अच्छी थी और
सभी सुख सुविधायो
से सुसज्जित थी
|
उन ४ आदमियों
ने उसे बतया
हम सभी भी
इस गुफा में
आये थे | पर
यहं इतनी सुविधा देखकर
यही रुक गए
| तुम्हे डरने
के लिए हमने
तुम्हे धक्का दिया . और
वह युवक भी
उसी जगह रुक
गया | बाकि गॉव
वालो का वहम
और पक्का हो
गया की कोई
भी लौटकर नहीं
आता उस गुफा
से |
Moral of the Story :
इस
कहानी को अगर
हम अपनी ज़िंदगी
में देखंगे की
ज्यादातर कोई भी नया
काम शुरू करने
पर लोग हमें तरह तरह
से डराते हैं
| की इस काम
को करोगे तो
ऐसा होगा वैसा
होगा हम पहले
भी इसे कर
चुके है | जैसे अगर
हमे नया बिज़नेस
स्टार्ट करना है
, हम अपने idea को किसी
के साथ discuss करते
हैं , तो पहले
तो वही सुनने
को मिलेगा ऐसे
कोई बिज़नेस नहीं
होता | तो यह हम
बाकि गॉव वालो
की तरह डर
कर रह जाते
हैं | और
ज़िंदगी जैसे चल
रही थी वैसे
ही चलती रहती
है | या उस
युवक की तरह
डर से जीत
जाते हैं और
उस काम को
कर लेते हैं
फैसला हमेशा हमको
ही लेना होता
हैं |
Tuesday, 21 May 2019
वह करो जो आप करना चाहते हो
वह करो जो आप करना चाहते हो-
आज राजेश और पल्लवी के घर ख़ुशी का माहौल था और हो भी क्यों नहीं आज 5 साल बाद उनके घर बेटे का जन्म जो हुआ है | दोनों उसका नाम सोचने में लग गए और finally उसका नाम रखा गया लक्ष्य | राजेश और पल्लवी अपनी संतान के बारे में कई सपने भी देख रखे हैं वो दोनों ने पहले से ही सोच रखा है वो अपने बेटे को Doctor बनाएंगे |
आज राजेश और पल्लवी के घर ख़ुशी का माहौल था और हो भी क्यों नहीं आज 5 साल बाद उनके घर बेटे का जन्म जो हुआ है | दोनों उसका नाम सोचने में लग गए और finally उसका नाम रखा गया लक्ष्य | राजेश और पल्लवी अपनी संतान के बारे में कई सपने भी देख रखे हैं वो दोनों ने पहले से ही सोच रखा है वो अपने बेटे को Doctor बनाएंगे |
जैसे ही लक्ष्य 4 साल का हुआ उसका admission शहर के अच्छे School में करा दिया गया | लक्ष्य बचपन से ही बहुत ही अच्छी Painting बनाता | किसी को यकीन ही नहीं होता की ये पेंटिंग 4 साल के बच्चे ने बनायीं है |
लक्ष्य पढ़ने में भी बहुत अच्छा था | हमेशा Class में 1st आता | क्लास 11 में उसे subjects select करने थे | न चाहते हुए भी उसे biology लेनी पढ़ी . क्यों की उसके parents चाहते थे की वह doctor बने , पर वह एक painter बनना चाहता था. लक्ष्य ने अपने पेरेंट्स से बात भी, की वह doctor नहीं बनना चाहता | पर उसके पेरेंट्स ने साफ साफ कह दिया वो उसे पेंटिंग में अपना Future खराब नहीं करने देंगे | मज़बूरी मे लक्ष्य को अपने पेरेंट्स की बात मन्नी पढ़ी | लक्ष्य का पढ़ाई में प्रदर्शन पहले से कुछ खराब हो गया. क्लास 12 करने के बाद लक्ष्य को Medical College में Admission लेना पढ़ा | और पढ़ाई पूरी करके लक्ष्य ने अपना Clinic भी खोल लिया | कुछ समय बाद लक्ष्य की शादी भी हो गयी और एक बेटी भी | पर उसके मन कही न कही अपना मुख्य लक्ष्य पेंटिंग करना सिर्फ सपना बन गया | पर अब लक्ष्य के जीवन का लक्ष्य था | जो काम वो नहीं कर सका वो उसकी बेटी करे | और लक्ष्य अपनी बेटी को एक Painter बनाना चाहता था , यह जाने बिना की उसकी बेटी क्या बनना चाहती है |
दोस्तों हम इस तरह की पहले भी कई बात सुन और पढ़ चुके होंगे | कई Movie भी देखि होंगी जैसे 3 Idiots, Taare zameen par, पर जब असलियत में अपने बच्चों पर apply करने की बात आती है, हम अपने बच्चों को दूसरों से compaire करने लगते है या सोचने लगते है जो काम हमने नहीं किया वो बच्चे करें या समाज क्या कहेगा आदि आदि | अभी ज़रूरत है अपने बच्चों को पूरी समझ देने की और उन्हें उनके पसंद का career select करने की आज़ादी देनी की |
अगर हम जीवन में सफल होना चाहते है (सफल होना मतलब खुश रहना संतुष्ट रहना, जीवन का पूरा आनंद लेना न की सिर्फ पैसे कामना ) तो वही करे जो हमें पसंद हो. आपने कई लोगो के बारे में सुना होगा जिनका लोगो ने पहले बहुत मज़ाक उड़ाया. पर आज सब उन्ही की तरह बनना चाहते है . जैसे सचिन तेंदुलकर , लता मंगेशकर , संदीप माहेश्वरी , आदि आदि अगर उनके पेरेंट्स भी उन्हें किसी और फील्ड में जाने के लिए वाद्य करते तो उनका क्या होता आप खुद ही सोच सकते है
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